अकबर बीरबल कहानी- Akbar Birbal Kahani In Hindi

अकबर बीरबल कहानी- Akbar Birbal Kahani In Hindi

यहाँ पर आपको अकबर बीरबल की कहानी मिलेगि जो बचो को बहोत ही पसंद आती है और आपको भी इसमें से बहोत जानने को मिलेगा। बीरबल हमेशा ही अपने चतुराई की वजह से जाने जाते है जिससे की यह स्टोरीज बहोत ही फेमस है. आशा करता हु आपको भी यह बहोत ही पसंद आएगी.

Akbar Birbal Kahani In Hindi Part 1

Akbar Birbal Kahani In Hindi 1
Akbar Birbal Kahani In Hindi 1

जाड़े के दिन थे। कड़ाके की ठंड थी। दरबार में बैठे अकबर बादशाह के मन में एक विचार आया. उसने दरबारियों से पूछा, “महल के पास की झील में सारी रात ठंड में क्या कोई पानी में खड़ा रह सकता है ? ” दरबारियों में से एक ने कहा, “नामदार, यह दिल से ठंडा है, बर्फ जैसे ठंडे पानी में खड़ा कोन रह सकता है. किसकी छाती इतनी चौड़ी की यह कर सके. अगर यह गर्मी होती, तो किसी को ऐसा करने की हिम्मत होती.

एक अन्य दरबारी ने कहा, ” ख़ुदावंद, पैसा एक अजीब चीज़ है. अगर आप इनाम दे तो पुरस्कार के लालच में कोई जोखिम लें सकता है. यह सुनते ही सम्राट ने एक बड़े पुरस्कार की घोषणा की. पच्चीस साल के एक गरीब युवक ने इस पुरस्कार की शर्त को स्वीकार कर लिया। इसलिए बादशाह झील चारों तरफ कड़े पहरे लगाए गए। युवक पूरी रात ठंडे पानी में खड़ा रहा।सुबह सम्राट झील के पास आया और उसने देखा कि युवक पानी में प्रार्थना कर रहा था।

सम्राट उसकी सराहना करने जा रहे थे तभी चौकीदारों में से एक ने कहा, मैंने इसे रात में गर्म लकड़ियों को जलाकर गर्मी लेते हुए देखा। युवक ने कहा, “तुम जूथ क्यों बोल रहे हो ? पुरि रात पानी में थी. वह खुद एक गवाह है. चौकीदार ने कहा, “क्या तुम महल से आ रहे दीपक की रोशनी को देखते नहीं थे? उस आदमी ने जवाब दिया, “हां, मैं रात भर उस चिराग की रोशनी देख रहा था. चौकीदार ने कहा, “क्या आपको उस दीपक की गर्मी नहीं मिल रही थी ? इसलिए गर्म यह आदमी गर्म रहा और अभी तक जीवित हैं सर, यह आदमी इनाम के लायक नहीं है. सम्राट ने युवक को पुरस्कृत किए बिना छोड़ दिया.

युवक बहोत ही निराश था। बीरबल उपनगरों से वापस आ गया, इसलिए वह उसके पास गया, क्या हुआ. बीरबल ने युवक से कहा, युवक ने कहा मेरी जान खतरे में है, बीरबल बोलै “लेकिन तुम्हारी जान खतरे में क्यों है?” युवक ने कहा, “मैं एक गरीब आदमी हूं। अगर मुझे पुरस्कार मिलता है, तो मेरी किस्मत खुल जाएगी और मई आराम से अपना घर चला सकता था अब बिना काम और खाने के में मर जाऊंगा। बीरबल ने उसे धैर्य रखने के लिए कहा।

जैसे बीरबल उपनगरों से लौट आए राजा को पता चला। उन्होंने तुरंत बीरबल को बुलाने के लिए एक सिपाही को भेजा। सिपाही बीरबल के घर गया और अपने नौकर को राजा का संदेश सुनाया। बीरबल ने कहा, अभी मैं खिचड़ी पका रहा हूँ। मैं जितनी जल्दी हो सके राजा के पास आ जाऊंगा। एक घंटे बाद, सिपाही लौट आया, और बीरबल ने वही संदेश भेजा। एक घंटा बीत गया लेकिन बीरबल नहीं मिला। तो सम्राट अधीर हो गया। उन्होंने अपने मन में सोचा में सोचा बीरबल ऐसी कोनसी खिचड़ी पका रहा है जो दो घंटे लग गए और फिरभी वह नहीं आया. में भी तो देखु क्या हो रहा है.

सम्राट स्वयं चार प्रमुखों और सिपाहियों के साथ बीरबल के घर गए। बीरबल जल्दबाजी सामने आई। उन्होंने कहा, अकबर आप बोलो तो बिना खाना खाये ही आपके साथ चालू पर अभी खिचड़ी पाकी नही है. अकबर देखने गए की यह हो क्या रहा है. उसने देखा तो उसे हसना आ गया. बिरबल ने चूल्हा जाया हुआ था और लम्बी लकड़ियों के ऊपर खिचड़ी का बर्तन रखा हुआ था जो की चूल्हे से बहोत दूर था.

सम्राट हंस पड़ा। उन्होंने बीरबल से कहा, “बीरबल, तुम एक मूर्ख हो। तुम्हारा दिमाग
काम कर रहा है या नहीं! इस चूल्हे की गर्मी उस बर्तन तक कैसे पहोचेगी जो तुम्हारी खिचड़ी पके. तुम्हारी खिचड़ी कभी नहीं पकेगी। बीरबल ने कहा अकबर भले ही आप मुझे बुद्धिमान न समझें पार मुझे उम्मीद है कि खिचड़ी जरूर पकेगी। बादशाह ने कहा, “बीरबल, मैं तुम्हें नहीं समझता। तुम्हारे दिमाग मे क्या चल रहा है।

बीरबल ने कहा जब दूर महल के छोटे से दीपक से उस नदीमे खड़े युवक को गर्मी मिल रही थी तो इस खिचड़ी के बर्तन को चूल्हे गर्मी क्यों नहीं मिलेगी। सिपाही का मुंह खुला का खुला रह गया। वह सिर झुकाए खड़ा रहा। सम्राट ने दूसरे सैनिक से कहा,
महल में आने के लिए युवक से कहो। उसे बताएं कि आपको आपका इनाम मिलेगा। यह थी बीरबल की चतुराई।

हमें विश्वाश है आपको Akbar Birbal Kahani In Hindi पोस्ट जरूर ही पसंद आया होगा और इसमें आपको बहोत कुछ जानने भी मिला होगा.

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