हिंदी नैतिक कहानियाँ – Free Hindi Moral Short Stories For Kids Part-2

बच्चों के लिए कुछ लघु हिंदी नैतिक कहानियाँ – Hindi Moral Short Stories For Kids Part 2

hello Readers, आज हम फिरसे आपके लिए कुछ मजेदार Some Short Hindi Moral Stories लेके आये है, आशा है की बच्चो को यह बहोत ही पसंद आएगी.

Also Read- 10 Short Hindi Moral Stories for Kids Part 1 (बच्चों के लिए लघु हिंदी नैतिक कहानियाँ )

रीछ और शेर का बच्चा Hindi Moral Short Stories For Kids

Short Hindi Moral Stories 1

सुबह का समय था, चारों तरफ कोहरा। एक शेर का बच्चा बड़े पेड़ के नीचे सो रहा था। उस क्षण, भालू टहलने के लिए चला गया। अचानक से उसकी निगाह बड़े पेड़ के नीचे पड़ी। आँखें फैलायी, बुद्धि चलायी, अहा! फुटबॉल। चलो फुटबॉल से खेलते हैं
चलो खेलें “। बिना देखे ही आ जाता है। फुटबॉल समझ के शेर शावक को उसने एक लात मारी। शेर का बच्चा हवा में लहराता हुआ उड़ा और उसने घबराकर एक पेड़ की एक शाखा पकड़ ली और जोर से गर्जना की.

लेकिन शाखा टूट गई, शेर का बच्चा धीरे धीरे गिर रहा था. भालू समझ गया, उसने पश्चाताप किया, लेकिन तुरंत वहा दौड़ा और दोनों हाथों से शेर शावक को गिरते हुए पकड़ लिया। अरे यह क्या! शेर शावक ने फिर से उस भालू को उछलने के लिए कह रहा था. एक बार फिर भालू ने के शेर शावक को एक लात मारी। दूसरी बार … तीसरी बार … ऐसा बार बार होने लगा।

शेर शावक उछल-कूद मस्ती कर रहा था। लेकिन भालू थक गया था. और उसे घर जाना था. मन ही मन में बोलै ऊप्स! कैसे मुसीबत में पड़ गए। एक बार फिर भालू ने के शेर शावक को एक लात मारी और वह भाग गया और इसबार निचे पकड़ने वाला कोई नहीं था और शेर का बच्चा गिर गया. फिर उसने सोचा यह तो नहीं करना चाहिए इसे तो चोट लग सकती है. दोनों को शिक्षा मिली और दोनों घर चले गए.

लीलू और पीलू Hindi Moral Short Stories For Kids

Short Hindi Moral Stories 4

दो कबूतर के बचे, एक हरा है, एक का नाम लीलू और दूसरे का नाम पीलू। दूसरा पीला है. हरी चीज हरा बचा खा रहा था. पीली चीज पीली खा रही थी। एक दिन लीलू ने एक पौधे पर कुछ हरा देखा। लीलू ने उसे खा लिया। ऊप्स! यह मिर्च थी। लीलू की जीभ फूल गई। वह रोने लगा. उसकी मा दौडी चली आयी. पीलू भी भाग गया। यह पीले रंग का फल का टुकड़ा लाया और नीलू ने उसे खा लिया।उससे मुंह में जलन रुक गई गया. माँ ने लीलू और पीलू को गोद में उठा लिया.

मैं बड़ा मैं बड़ा Hindi Moral Short Stories For Kids

Short Hindi Moral Stories 2

जूही के पास बहोत सारे खिलोने, पूरा दिन वह उसे खेले और रत को टोकरी में रख कर सो जाये। एक रात टोकरी में जोर से हल चल हुई, खिलौने में हाथी की लड़ाई बंदरों के साथ हो गयी। बंदर कहता है, “मैं बड़ा हूँ।” हाथी कहता है, जाओ, जाओ। मैं बड़ा हूँ दोनों में बहोत देर तक जगडा हुआ और दोनों न्याय पाने के लिए टॉय भालू के पास गए और बोले। भालू भाई , भालू भाई … “क्या मैं बड़ा हूँ या यह हाथी बड़ा है?” भालू भी उलझन में पड गया यूं तो हाथी बड़ा होता है, लेकिन यहां बंदर बड़ा दिखता है.

भालू तय नहीं कर सकता था, इसलिए उसने कहा, “चलो बस में चलते हैं. चलो चलते हैं। ” भालू , हाथी और बंदर सभी बस के पास गए. वहां जाकर, वह जा कर सबने देखा। बस भी एक खिलौना था तो वह तो सबसे छोटा था. छोटे! बंदर खी खी करके हंसा … हाथी ने बोला बस बस, अब और कोई फैसला नहीं करना, चलो जाके सो जाते है.

लालची लल्लू भाई Hindi Moral Short Stories For Kids

Short Hindi Moral Stories 9

लल्लू भाई हरा नारियल पाने के लिए बाहर चले गए। एक दुकान पर जा रहे हैं. मूल्य पूछा। दुकानदार कहता है, ‘दस रुपये।’ लल्लू भाई लालची थे, कहते हैं “पाँच रुपये में दे दो। ” दुकानदार कहता है, “आगे बढ़ो और सस्ता नापो आगे आपको पांच रुपये में मिल जायेगे नारियल। लल्लू भाई आगे बढ़ गए।

नारियल के ठेले के पास की दुकान पर गए और कहा। औ भाई कितने के है नारियल के रुपए? दुकानदार कहता है, पांच रुपए। लल्लू भाई को अधिक लालच आया और कहते हैं, ‘दो रुपये दो।’ दुकानदार को गुस्सा आ गया, उसने लल्लू भाई को कहा, सामने एक नारियल का जाड है! खुद ही वहां से तोड़ो लो तो फ्री में मिलेगा…!

लल्लू भाई खुशी से भाग गए। तुरंत नारियल के जाड पर चढ़ गए, उसने नारियल पकड़ा और उसे तोड़ने की कोशिश की। लेकिन नारियल नहीं तूटा लल्लू भाई का पैर फिसल गया। लटकते नारियल के साथ लल्लू भाई! लल्लू भाई ने अपने पैर हिलाए और “बचाओ, बचाओ” के नारे लगाए.

वहां से, सलीम भाई सर्कस वाले अपनी बड़ी साइकिल के साथ निकल रहे थे. सलीमभाई को दया आ गई। वह अपने पहियों में से एक के साथ खड़ा और साइकिल को अपने हाथों से लल्लू भाई के पैर के पास ले गए पास ऊपर गए बचाने के लिए , लेकिन वहाँ साइकिल फिसल गई … और सलीमभाई भी लल्लू भाई के पैरों से लिपट गए. अब बचाओ, बचाव का रोना दोगुना हो गया था.

वहां जे तनुभाई ने टेम्पो लेके आ रहे थे। तनुभाई ने टेम्पो जाड़ के निचे खड़ा किया ताकि वह दोनों टेम्पो पर चढ़ सके. अब तापुभाई और सालीभाई डरे हुए हैं कि ऊपर वाला भाई अगर नारियल छोड़ता है! तो दोनों गिरेंगे, तपुभाई चिल्लाया, भाई तु नारियल मत छोड़ो, मैं तुम्हें एक हजार रुपये दूंगा। लल्लू भाई को लालच आया और उसने निचे देख कर हाथ फैलाये लाओ हजार रुपये और दोनों गिर गए. लल्लू भाई का लालचीपन सलीमभाई को भी भुगतना पड़ा.

मस्त कौआ और राजा Hindi Moral Short Stories For Kids

Akbar Birbal Kahani In Hindi 1

सहर में एक था कौआ वह बहोत ही खुश मिजाज था उसको कोई गम नहीं था। एक बार राजा को उस पर गुस्सा आ गया। तो राजा ने अपने आदमियों से कहा, ‘जाओ और इस कौए को सहर के बहार कीचड़ में फेक के आओ. राजाजी के आदेशानुसार कौवे को कीचड़ में फेंक दिया गया। कौआ भाई, कीचड़ में फिसलते गीत गाने लगा.

हम फिसलन ना सिख रहे है, भाई!
हम फिसलन ना सिख रहे है.

राजा और उसके लोगों ने सोचा कि यह कौआ क्यों कीचड़ में फंसकर दुखी होने के बजाय खुशी से गीत गा रहा है। राजा क्रोधित और भी हो गया और उसने एक और आदेश दिया उसे कुएँ में डाल दो और वह डूब के मर जायेगा। कौए को एक बहोत गहरे कुएँ में फेंक दिया गया। कौआ भाई कुएँ में तैरते हैं और बोलते हैं.

तैरने में जो मजा वह और कहा,
हम तैरना सिख रहे है, भाई!
हम तैरना सिख रहे है.

राजा अब और अधिक क्रोधित हो गया। वह कहता है, ‘अब कौवे को सख्त सजा दो अब सरल सजा से काम नहीं बनेगा।’ तब कौए को कांटों के एक बड़े जाल में फेंक दिया गया, तब भी कौआ भाई वही हैं! प्रफुल्लित! कांटों में खुशी के साथ गाने लगे:

हम तो कान खुजा रहे है, भाई!
हम तो कान खुजाना सिख रहे है.

राजा कहता है, यह कौआ बहुत बलवान है! दुःख जो भी हो, वह दुःख का कारण नहीं बनता है। आइए इसे एक ऐसी जगह पर रखें जहाँ उसकी दर्दनाक मौत हो जाये। फिर कागदभाई को एक तेल की टंकी में डाल दिया गया और कौआ भाई खुश हो गए।

बालो पर तेल डालकर बोला, भाई!
हम तो बाल में तेल लगा रहे है.

अब राजा को गुस्सा भी आ रहा था और वह भी अब तो इसे छुटकारा पाना चाहते थे, पर वह कुछ भी करे इसपे तो कोई असर ही नहीं हो रहा था, इस बार उसने सोचा की कुछ भी करके इसको दुःख तो देना ही है. इस बार अपने सैनिको को बोलै इसको बहोत अँधेरे वाली कल कोठरी में बंध कर दो. सिपाही ने उसे काल कोठरी में बंध कर दिया। केलिन कौआ अब भी गीत गए रहा है.

हमें तो नया घर मिल गया, भाई!
हमें तो नया घर मिल गया है.

अंत में राजा थक गया। राजा को लगा की यह कौआ खुद ही इतना खुश है की कोई भी इसको दर्द, दुख देना चाहे तो भी नहीं दे सकता, उसको वह कौआ बहोत ही पसंद आया उसने उसको कहा की अब जब भी तुम्हे मदत की जरूरत होगी तो हम करेंगे और सदा के लिए तुम्हारे लिए राज द्वार खुले तुम जब चाहो महेमान बन के आ सकते हो.

कौआ और तोता Hindi Moral Short Stories For Kids

Free Hindi Moral Short Stories For Kids Part-2 1
Free Hindi Moral Short Stories For Kids Part-2

एक तोता था। वह बहुत भूखा है. उसको बहोत दिनों से खाना नहीं मिला था फिर उसने आम के पेड़ पर आम देखा, बहोत बड़े आम, पक्के आम, पिले पिले आम. लेकिन उस आम के पेड़ पर कौआ रहता है. उस तोते को देखकर कौआ गुसा जो गया और बोला यह आम का पेड़ मेरा है। भाग जाओ तोते, भाग जाओ यहासे, तोते ने कौए से कहा मुझे बहोत भूख लगी है पर उसने एक नहीं सुनी।

का … का … का … का … का … का …

तोते ने कौवे की दहाड़ ने चौंका दिया। तोता उड़कर दूर एक घर में चला गया। उसकी नज़र एक बड़े रंगीन गुब्बारे पर पड़ी। तोता गुब्बारे को अपनी चोंच में लेकर आम के नीचे बैठ गया। उनके दिमाग में एक आइडिया आया। तोते ने फिर गुब्बारे पर अपनी चांच मारी, गुब्बारा जोर से फटा उसकी आवाज से कौआ बहोत ही डर गया और आम के जाड पर से उड़ कर दूर चला गया.

तोते की तरकीब काम कर गयी वह पेड़ पर चढ़ा और अपनी भूख आम खाकर मिटाई, उसे आम बहोत ही मीठे लगे और उसको खाने में बहोत ही मजा आया, फिर वह अपने घर चला गया.

बड़ा बरगद का पेड़ Hindi Moral Short Stories For Kids

Free Hindi Moral Short Stories For Kids Part-2 2
Hindi Moral Short Stories For Kids

रवि अपने दादा के साथ टहलने गया था। उसने गाँव के बहार एक बहोत बड़ा बरगद का पेड़ देखा। पेड़ बहोत ही पुराना और बहोत ही बड़ा था। रवि उस पेड़ को देखकर खुश था। लाल लाल छोटे बरगद के फल को देखा और कहा: “दादाजी, यह क्या है?” दादाजी कहते हैं: “यह बरगद का फल है। रवि दादा के कंधे पर बैठ गया और बरगद के बजट बड़े हरे हरे पान देखने लगा। दादाजी यह तो बहोत ही बड़े पत्ते है। उस पेड़ को रवि ने नापने की कोशिश किए मगर नहीं कर पाया।

जब रवि ने बरगद के पेड़ के बहोत ऊपर देखा, तो उसकी शाखा पर एक बंदर बैठा था। उसने पेड़ के तना देखा वजह इतना बड़ा था की रवि को बहोत आश्चर्य हुआ. उसने अपने दादाजी को पूछा यह जमीं में कहा जा रहे है. दादाजी ने कहा यह उस पेड़ के मूल है ऊह जमीन में बहोत अंदर तक जाते, उसने पूछा दादाजी यह पेड़ कितना पुराना होगा। दादाजी ने कहा जब में छोटा था तब में भी यहाँ खेलता था. रवि यह सुनकर बहोत ही खुश हुआ. फिर दुपहर के भोजन का टाइम हो गया था वह दोनों घर की ओर चलने लगे.

चतुर भोलू Hindi Moral Short Stories For Kids

Poem In Hindi For Kids (बच्चों के लिए हिंदी में कविता) Part 1 1

एक छोटा बच्चा था नाम था भोलू। बहुत चालाक भी था। एक बार भोलूभाई सब्जी खरीदने गए। बाजार में विभिन्न सब्जियों के कई लॉरी थे। भोलूभाई शंभुभाई शाकवाला के बगल में खड़े हुए और वहा देखा बहोत ही तजि सब्जी थी. शंभुभाई भिंडी कितने की दिए. वह बोले चालीस रुपये किलो। बैंगन कितने की दिए, वह भी चालीस रुपये किलो।

जो भी लो सब चालीस रुपये किलो है. भोलू बोला एक काम करो मुझे एक किलो भिंडी दे दो, शंभुकाका ने एक किलो भिंडी दिया, और भोलू का विचार बदला भिंडी रहने दो मुझे एक किलो आलू दे दो. शंभुकाका ने एक किलो आलू दिया, फिर भी भोलू का विचार बदला आलू रहने दो मुझे एक किलो टमाटर दे दो. फिर शंभुकाका ने कहा लाओ चालीस रुपये।

फिर भोलू बोलै किसके चालीस रुपये, शंभुकाका ने कहा टमाटर के लिए चालीस रुपये। लेकिन मैंने टमाटर को आलू के साथ बदल दिया ना तो कैसे पैसे, शंभुकाका ने कहा तो आलू के चालीस रुपये दो, भोलू बोलै मेने तो भिंडी वापस करके आलू लिए न तो कैसे चालीस रुपये। शंभुकाका तो बेटा भिंडी के चालीस रुपये दो.

भोलू बोलै मेने तो भिंडी लिए ही नहीं तो कैसे पैसे। शंभुकाका सोच में पद गए, है यह तो सही है उसने भिंडी तो लिए ही नहीं तो किसके पैसे। उसने भोलू को कहा ठीक है. वह भी चक्कर खा गए. और भोलू के पापा ए और उसने शंभुकाका को चालीस रुपये दिए. शम्भु काका ने भोलू के पापा को कहा आपका लड़का तो बहोत ही चतुर है.

उल्लू के घर में लगी आग Hindi Moral Short Stories For Kids

Free Hindi Moral Short Stories For Kids Part-2 3
Free Hindi Moral Short Stories For Kids

एक बहोत ही सुंदर गाँव था! जंगल के बीच में एक सुंदर गांव जिसमे सभी प्राणी एक साथ रह रहे थे! गैंडा उस गाँव में यहा वहा भटक रहा था जहाँ वह अचानक रुक गया था। अरे ये क्या है? यह उल्लू के घर में आग लगी है। गैंडे सीधे गाँव के सरपंच शेर के पास गए। शेर तुरंत गाँव लौट आया और चिल्लाया। “आपके घर में जो भी बर्तन हैं उन्हें ले लो और तुरंत तालाब से पानी भरें और उल्लू के घर पर पानी छिड़कें वह बड़ी विशाल आग लगी है.

शेर की बात सुनकर चिड़िया तो एक चम्मच लेकर पानी से भरने के लिए झील की ओर भागी। कौआ कुकर ले कर भागा। कबूतर के हाथ में केतली और बाघ के हाथ में बाल्टी। गिलहरी के सिर पर कटोरा। शेर भी बर्तन लेकर सबके के साथ भागा। गाँव के सभी जानवरों और पक्षियों ने अपने हाथों में बर्तन लिए और उल्लू के घर की आग को बजाने जिल से पानी भर कर उल्लू के घर पर डाल रहे थे.

बन्दर तो उल्लू के घर के अंदर जाकर सब सामान बाहर सामान फेकने लगा. सबने जो बन पड़ी वह कोशिश कियी पर आग बुज नहीं रही थी. सभी थके और भ्रमित थे। अब क्या करे? जंगल से हठी का झुंड वापस आ रहे थे, शेर ने देखकर बोला आग लगी है हटी पानी लकेकर आओ. चालीस-पचास हाथियों के झुंड ने झील से अपनी सूंढ़ पानी लेकर के साथ आग पर पानी छिड़कना शुरू कर दिया। सभी लोग बहुत खुश थे, क्योंकि आग बुझ गई थी.

चूहों का गांव में उत्पात Hindi Moral Short Stories For Kids

Short Hindi Moral Stories 7

नदी के किनारे एक गाँव था। उस गाँव में चूहे का बहुत उत्पात था। जहा पे जाओ वहां चूहों को देखो, घर में चूहे, और यार्ड में चूहे। रसोई में चूहे, अलमारी में चूहे। बॉक्स में चूहे और कोठरी में चूहे। बड़े चूहे और छोटे चूहे चूहे। मोटे चूहे और पतले चूहे, काले चूहे और सफेद चूहे। गांव में जहा भी देखिए वहाँ केवल चूहे और चूहे.

चूहों की एक सेना थी। सारा दिन चोंच मारना उसका काम। चूहे जार देते हैं। दीवारों में ड्रिल जैसे छेद कर देते थे, कपड़े फाड़े। कागज़ काटे। गांव वाले इस चूहों से बहोत ही परेशान थे. ख़ुशी से खा भी नहीं सकते थे, ख़ुशी से नहीं पी सकते, सुख से नहीं बैठ नहीं सकते और सुख से नहीं सो सकते थे। वहाँ जाओ, इस तरह जाओ … चुन … चुन … मंदिर जाओ चुन … चुन … चुन … जहाँ भी जाओ चुन … चुन … चुन. सभी इस हद से परेशां थे की लोग गांव छोड़ के जाने लगे थे.

एक दिन की बात है। एक बाँसुरी वादक गाँव आया। उन्होंने पीले रंग का लहंगा पहना था. शीर्ष पर लाल टोपी। लंबे लंबे बाल और छोटी दाढ़ी। वह बांसुरी बजा रहा था गांव में घूम रहा था। लोगों ने पूछा, “भाई, तुम्हारी बांसुरी कैसी है? “कमाल की बजती है। लोजो की भीड़ जमा होने लगी और साथ साथ चूहे भी इकठे होने लगे सब चौक गए, सब सोच रहे थे यह क्या हो रहा है. सब को कुछ समाज नहीं आ रहा था.

गांव के मुखिया को एक तरकीब सूजी, वह उस बासुरी वाले के पास गया और बोलै तुम्हे एक काम करना होगा। हम चूहे से बहोत ही परेशां है. हमें इन चूहों से बचाओ। तुम कुछ भी करो, बाँसुरी वादक कहता है, मैं इसे करूंगा, लेकिन मैं इसके बदले में एक हजार रुपये लूंगा।

ग्रामीण कहते हैं,ठीक है। बाँसुरी वादक सड़कें मैं बीच में खड़ा हो गया और बांसुरी जाने लगा। बाँसुरी की धुन पुरे गांव में सुनाई देना शुरू हो गयी। जिसे सुनकर सभी चूहे एकत्रित होने लगे। बडे छोटे, मोटे और पतले, सभी चूहे आने लगे। चूहे बाँसुरी वादक के पास जाकर नाचने लगे । कोई चूहे कूदकर आने लगे. अब चूहे एक साथ जमा हो गए. कोई चूहा अलग नहीं था.

बाँसुरी वादक आगे बढ़ा। चूहों की सेना इसके पीछे पीछे, फिर नदी आ गई। बाँसुरी वादक नदी में उतर गया. चूहे भी नदी में उतरने लगे। बांसुरी बजाने वाला नदी के सामने से पार हो गया और चूहे सब पानी में डूब गए! अब गाँव में एक भी चूहा नहीं था। गांव वाले बहुत खुश। सभी ने बांसुरी वादक की सराहना की।

बांसुरी वादक कहता है, “लाओ एक हजार रुपये। ” लोग कहते हैं, किसके पैसे, बासुरी से चून्हे को मजा आया उनसे लो हजार रुपये, और सभी लोग चले गए. बांसुरी वादक ने कुछ नहीं कहा। उसने अलग स्वर में बांसुरी बजानी शुरू कर दी। बांसुरी की धुन हवा में लहराती थी और गाँव के घरों में फैलने लगा। फिर क्या? घरों में से सारे लड़के बाहर आने लगे। छोटे लड़के आए और बड़े आए। कोई नाच रहा कोई कूद रहा। बांसुरी वादक बांसुरी बजाते हुए नदी की ओर चलने लगा.

गांव वाले घबरा गए। उसे चिंता थी कि सभी लड़के डूब जाएंगे। जल्दी ही सभी गांव वाले ने मिल कर एक हजार रुपये जमा किये । बांसुरी वादक के पास गए और बोलो, “भाई, बांसुरी बजाने वाले, तुम्हारे हजार रुपये ले लो, हमें हमारे लड़के वापस दे दो।” उसने बांसुरी बजाना बंद कर दिया। ग्रामीणों से एक हजार रुपये लिए। उसने सभी लड़कों को वापस सौंप दिया वह बांसुरी बजाता हुआ भाग गया.

कुए का मेंढक Hindi Moral Short Stories For Kids

Free Hindi Moral Short Stories For Kids Part-2 4
Free Hindi Moral Short Stories

एक कुएँ में एक मेंढक उसकी पत्नी और उनके बच्चे रहते थे। उसमे मेंढक का पिता खूब मोटा और बहोत खता था, वह कभी कुवे के बहार नहीं गया था और उसको बहार की दुनिया का कुछ पता नहीं था. वह सिर्फ इतना मानता था कि कोई मेरे जितना बड़ा नहीं है. इतना ही नहीं। एक बार मेंढक के बच्चे कुएं की दीवाल के ऊपर खेल रहे थे। तो वहाँ से एक हाथी गुजर गया। मेंढक शावक घबरा गया। “अरे बाप रे! इतना बड़ा जानवर!

वे कुएँ में कूद गए और माँ और पिता से कहने लगे, “मा-बापू! हमने एक बड़ा जानवर देखा। यह बहुत, बहुत बड़ा था। ” मेंढक कहता है, “हो सकता है।” लेकिन मेंढक कहता है, नहीं, यह नहीं हो सकता। मैं सबसे बड़ा हूं. फिर उसने बच्चे से पूछा: “क्या उसका पेट मेरे पेट की तरह था?” बच्चा कहता है, अरे पिताजी! यह उससे भी बड़ा है. तो मेंढक को गलत लगा.

वह कहता है, “अब तुम जानते हो कि मेरा पेट कितना बड़ा है।” उसने पेट में हवा भरी उसका पेट और बड़ा हो गया। फिर पूछा, “बॉल! क्या यह इससे बड़ा था? ” अर्थात् एक और बच्चा कहता है, “अरे पिताजी! यह उससे भी बड़ा है। ” मेंढक के पिता फिर से पेट में हवा भरने लग गया. उसकी पत्नी की चिंता बढ़ने लगी.

उसने कहा अब तुम ज़िद छोड़ दो नहीं तो आपके पेट में दर्द होगा। ” लेकिन मेंढक नहीं मानॉ। उसका पेट और फुलाया,और फुलाते हि गया, उसने इतना पेट फुलाया की उसका पेट ही फैट गया और उसका अभिमान टूट गया और वह मर गया

जंगल के राजा शेर का न्याय Hindi Moral Short Stories For Kids

Short Hindi Moral Stories 1

राजू जंगल में टहलने गया। आगे जाकर उसने एक पिंजरा देखा। पिंजरे में एक बाघ बांध था। राजू भाई पिंजरे के करीब चले गए। बाघ ने राजू से विनती की, “भाई, मुझे इस पिंजरे से बाहर निकालो। लेकिन तुम तो बाघ हो। अगर मैं तुम्हें बाहर कर दूं, तो तुम मुझे खा जाओगे। बाघ ने कहा नहीं भाई। कोई बचाने वाले को मारता है क्या? ” राजू भाई दयालु थे। उसने पिंजरा खोला। बाघ बाहर आ गया। राजू भाई लगा कि चलो आज अच्छा काम किया।

इससे पहले कि राजू भाई यह सोचकर खुश हों, बाघ राजू भाई की और बढ़ता है और कहता है, “मैं बहुत भूखा हूं, मैं तुम्हें खाऊंगा।” राजू भाई घबरा गया। अपने हाथों को जोड़ते हुए, उन्होंने बाघ से कहा, “हे बाघ भाई, जब मैं तुम्हें पिंजरे से बाहर ले गया था, तब तो तुमने मुझसे कहा था कि मैं तुमसे कुछ नहीं करूंगा।” वाघ ने कहा, “ठीक है, मैंने कहा हो सकता है, लेकिन मैं बहुत भूखा हूं। मेरे पास शिकार खोजने की ताकत नहीं है। इसलिए अब मुझे तम्हे खा कर अपना पेट भरना है।

जंगल का राजा शेर वहां आया। राजू भाई ने सिंहराजा को सारी बात बताई। शेर ने सुना और पूछा, “क्या यह पिंजरे में बाघ था? इस पिंजरे में एक बड़ा बाघ कैसे फिट होता है? यह नहीं हो सकता। ” वाघ ने कहा, “यह सही है। मैं एक पिंजरे में था। ” शेर कहता है, “मैं विश्वास नहीं करता। मुझे देखना है।

कुछ काम करो बाघ , तुम पिंजरे में वापस जाओ। नियमों के अनुसार, बाघ पहले की तरह तुरंत पिंजरे में चला गया। जैसे ही बाघ अंदर गया शेर ने पिंजरा बंद कर दिया और बोलै अब तुम पिंडे में ही रहोगे तुम्हारी सजा यही है. उसने राजू को मरने से बचा लिया। यह होता है अच्छे राजा का न्याय!

पुरानी यादे Hindi Moral Short Stories For Kids

Free Hindi Moral Short Stories For Kids Part-2 5
Free Hindi Moral Short Stories For Kids

बच्चों को आपको एक कहानी सुनाता हु। क्या आपने बाघ की कहानी सुनी है? मेरे दोस्त मेरे पास आओ, मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूं। यह कई साल पहले की बात है। उस रोज घनी रात थी, गन मेरे पास थी। मैं जंगल से गुजर रहा था। जा रहा था नहीं… नहीं… आ रहा था। अरे …. जा रहा था … फिर? अंधेरा था, मुश्किल से दस बजे होंगे। कोयल को को बोल रही थी … और मुझे भूख लगी थी। मैं कांप रहा था, मैं कोयल की कूक से डर रहा था, मैं भूख से मर रहा था। में भी डर से गाने लगा गाना।

गाते समय मेरा राग खराब हो गया, एक बाघ झाड़ी से बाहर आ गया। वह चिल्लाया, मैं रोया। यह मेरी तरफ दौड़ रहा था, मैंने भी भगा … वह पीछे , मैं आगे था, में ऊपर, वह निचे, मेरी बचने की और उसको मुझे खाने की बड़ी ही घमासान लड़ाई हमारे बिच में हो रही थी, में पेड़ के ऊपर चढ़ गया. एक पेड़ से दूसरे पेड़, एक शाखा से दूसरी शाखा।

मजेदार Hindi Moral Short Stories For Kids

फिर में चिल्लाया बचाओ … बचाओ … भागों … भागों … फिर … फिर क्या हुआ? फिर में बड़े पेड़ पे चढ़ काया और मुझे याद आया मेरे पास तो बंधुक है, मेने बंदूक चालयी हवा में, और बाघ डर गया और भाग गया. अरे मैं क्या कहूं वास्तव में? मज़ा आ गया था उस रात तो ! मुझे चोट लग गई थी! और मैं बुरी तरह घायल हो गया था। इसके अलावा में निचे उतरा पेड़ से और घर की और चला, और में बच गया! क्या मज़ेदार बात है!

करेला Hindi Moral Short Stories For Kids

जय जतिन के घर पे खेलने गया और उसने एक बड़ा इनाम देखा और जतिन को कहा बहोत ही अच्छा पुरस्कार है बहोत ही सुन्दर है यह तो. और उसने जतिन को एक प्रश्न पूछा।

जय: तुम्हे यह पुरस्कार स्कूल से मिला है?
जतिन: नहीं, मुझे यह पुरस्कार स्कूल से नहीं मिला है.
जय: तो कहा से मिला और तुमने कोनसा बड़ा काम किया?
जतिन: इसकी वजह करेला है.
जय: तुमने करेले का बहोत ही सुन्दर चित्र बनाया था क्या की तुम्हे यह इनाम मिला।
जतिन: नहीं भाई यह मुझे मेरी माँ ने दिया है और अच्छा करेले का चित्र बनाने के लिए नहीं करेले की सब्जी को खाने के लिए.
जय: हाहाहा

यह बात सुन कर जय और जतिन दोनों हसने लगे

भारी पड़ा मेला Hindi Moral Short Stories For Kids

Free Hindi Moral Short Stories For Kids Part-2 6
Hindi Moral Short Stories For Kids Part-2 6

शहर में एक मजेदार मेला था। हर कोई मेले की बात कर रहा था यश उनके बंगले नंबर तीन में रह रहा था उसे भी मेले में जाना था, उसके साथ दादा भी रहते थे हैं, वह अपने दादा के साथ मेले में गया. वह बहुत खुश था। यश खिलौने की दुकान के सामने सीधे खड़ा रह गया। उसने कहा: “दादाजी, मुझे यह खिलौना दिलाओ!” दादाजी कहते हैं: “कोई खिलौना नहीं!”

वे वहां से चले गए। यश आइसक्रीम की दुकान के सामने खड़ा था। उसने आइसक्रीम खाने की जिद की। दादाजी ने समझाया: “बेटा! चलो पहले मेला देखते हैं! फिर हम जो चाहें ले लेंगे! ” दादाजी ने खिलौना नहीं ले के दिया। आइसक्रीम भी नहीं खिलाई.

यश काफी गुसा हुआ. तो उसने बड़े पहिए वाली गाड़ी को देखा और कहा: “दादाजी, मैं उस गाड़ी में बैठना है।” दादाजी इस बार खुश हैं और कहते हैं: “ठीक है! तुम यहाँ खड़े रहो! मुझे टिकट लेनी होगी तो तुम कही दूर मत जाना यही खड़े रहना बस। दाजी टिकट लेने गए, यश खड़ा था। एक मोटरसाइकिल पर एक खिलाड़ी आया। चारों तरफ तेज आवाज हो रही थी। सब उसे देखने जा रहे थे था। यश भी चला। दादाजी टिकट लेकर आ गए। उसने वहाँ यज्ञ नहीं देखा।

दादाजी हांफने लगे और यश की खोज करने लगे। यश इस ओर रो रहा था। एक पुलिस वाले ने उसे रोते हुए देखा। उसने पूछा: “तुम्हारा नाम क्या है? तुम किसके साथ हो? ” यश ने कहा: “मैं अपने दादा के साथ आया हूँ। मेरा दादा खो गया है। ”पुलिस चाचा ने कहा: “चिंता मत करो। मैं तुम्हें अपने घर ले जाऊंगा। आप कहाँ रहते हो.

यश ने रोते हुए कहा: प्रतिज्ञा नगर, आशीष सोसाइटी, बांग्ला नंबर तीन । मेरे दादा का नाम लालदास है। ” यह सुनकर, पुलिस अंकल कहते हैं: “मैं तुम्हारा दादा लालदास तक तुम्हे पहचा दूंगा। और मैं तुम्हारे दादाजी को भी ढूंढूंगा। यश अभी भी रो रहा था। पुलिसवाला कहता है: “मत रो! चलो, मैं तुम्हें आइसक्रीम खिला दूं। ” यश ने कहा: “मैं आइसक्रीम नहीं खाता। मैं दादाजी के पास जाना चाहता हूं। ” पुलिसवाले ने समझाया: “तुम्हारे दादाजी को मुझे ढूँढना होगा। तब तक, इस पॉपकॉर्न को खाएं.”

यश ने रोते हुए कहा: “नहीं, मुझे कुछ नहीं खाना है। मैं दादाजी के पास जाना चाहता हूं। ” पुलिस वाले चाचा और यश धीरे-धीरे चल रहे थे। थोड़ी देर बाद खिलौने की दुकान आ गई। पुलिसवाले ने कहा: “मैं तुम्हें एक खिलौना दिलाता हु।” यश कहता है: “नहीं, मुझे खिलौना नहीं चाहिए। मैं दादाजी के पास जाना चाहता हूं। ” पुलिस चाचा ने बार-बार कह कर यश को खिलौना लेने के लिए मना लिया। यश ने रोते हुए कहा: मुझे दादा की जरूरत है, मुझे और कुछ नहीं चाहिए !!

कुछ देर बाद दादाजी ढूंढते हुए यश को देख लिया और उसके पास आ गए, यश उनको देख ते ही खुश हुआ. रट हुए दादाजी को बोलता हिअ चलो घर चलते है. दादाजी ने कहा अभी तो मेला देखना बाकि है पर यश कहता है नहीं देखना मेला, नहीं लेने खिलौना और नहीं खानी इसक्रीम मुझे घर जाना है, सब हसने लगे और दादाजी और यश फिरसे मेला देखने चले गए और इस बार यश दादजी की ऊँगली कस के पकड़ कर चल रहा था.

लव कुश की बहादुरी Hindi Moral Short Stories For Kids

वाल्मीकि के आश्रम में सीताजी बैठी है और उनके दोनों पुत्र लव और कुश आसपास खेल रहे है. वह पर एक घोडा आता है वह काफी शुशोभित है तो दोनों भाइयो को वह पसंद आ गया. और वह उस घोड़े को देख रहे थे.

लव: अरे, यह बहोत ही सुन्दर घोड़ा है। चलो इसे पकड़ लेते हैं।
कुश: गुरुदेव कहते थे कि उनके पीछे एक बड़ी सेना होती है उसे घोड़े को जो भी कड़ेगा उसको उस सेना के साथ लड़ना पड़ता है। लव: घोड़े को पकड़ लिया बोलो अब तो तुम हमारे वहां बनोगे, क्यों की तुम बहोत ही सुन्दर हो. अरे यह घोडा तो राजा राम का लगता है कोई बात नहीं फिरभी अब तुम मेरे हो.

कुश: क्या इसे आश्रम की गौशाला में बांध दिया जाना चाहिए?
लव: हा क्यों नहीं अबतो यह हमारा हो चूका है (थोड़ी देर बाद सैनिक घोड़े को ढूंढते हुए आश्रम तक आते है)
सैनिक: लड़कों, घोड़े को छोड़ दो। यह राजा रामचंद्रजी का हैं. तुम्हे पता भी है? अगर तुम ऐसा नहीं करते तो तुम दंड दिया जायेगा आपको लड़ना होगा।


लव: अरे तुम हमें दंड दोगे, तुम भाग जाओ यहाँ से वर्ण तुम्हे भी बांध देंगे।
सैनिक: तो तुम लड़ना चाहते हो.
लव: (धनुष को पकड़े हुए) तो हम तैयार हैं।
कुश: (आगे बढ़ते हुए) हां, हां, हम तैयार हैं।
लव: भाई कुश, अभी चल, यह अकेला है। उस के साथ
मैं अकेले लड़ूंगा।
(दोनो में लड़ाई। लवसैनिक को जमीन पर गिरा देता है। सेना के दूसरे सिपाही आ रहे हैं। लव-कुश ने उन सबको भी हरा दिया। सिपाही वापस चले गए बिना घोडा लिए )

यह थी लव कुश की बहादुरी, वह दोनों ही कही सैनिक पर भारी पड़े और उन्होंने सबको परास्त कर दिया और भगा दिया.

टॉयहाउस Hindi Moral Short Stories For Kids

Free Hindi Moral Short Stories For Kids Part-2 7
Free Hindi Moral Short Stories For Kids

एक थे रूपेशका। वह बच्चों को बहुत पसंद करते हैं। रूपेशका के लड़के बच्चो के साथ अमेरिका चले गए थे. वह चले गए उसके बाद उनके घर में कोई बच्चे नहीं थे. रूपेशका के घर पर बहुत सारे खिलौने थे। रूपेश काका ने आसपास के बच्चों को अपने घर आमंत्रित करने के लिए एक कमरे में खिलौने की व्यवस्था की और अपने घर का नाम ‘टॉयहाउस’ रखा।

रूपेशका ने जाने के लिए एक बोर्ड पर लिखा। “मुझे एक खिलौना दो और दो ले लो. बच्चों ने टॉयहाउस में खूब मस्ती कर रहे थे और जो कहे वह खिलौना बच्चे घर ले जा सकते थे. अक्षय और श्रीकांत भाई हैं। अक्षय को रूपेश काका खिलौना घर बहुत पसंद आया। वह खेलने के लिए अक्सर वहां जाता है। लेकिन श्रीकांत उसके साथ नहीं आता है। उसे दिन भर अपने मोबाइल पर खेलना अच्छा लगता था। अक्षय ने अपना विमान रूपेशका को सौंप दिया और बदले में दो अन्य खिलौने लाए: एक जेसीबी और एक बात करने वाला बंदर।

अक्षय ने श्रीकांत को घर पर खेलने के लिए कहा. श्रीकांत ने पहले तो मना कर दिया। लेकिन, जैसा कि इसने देखा, यह बंदर हमारी तरह बोलता है, इसलिए उसने तुरंत अपना मोबाइल नीचे रखा और बंदर से बात करने लगा। यहां तक ​​कि बंदर जो श्रीकांत की तरह बोलता था। अगर श्रीकांत को गुस्सा आता है, तो भी बंदर को भी गुस्सा आता है। यदि वह दांत निकाला जाता है, तो यह बन्दर भी दांत निकालता है।

अक्षय ने भी इसे देखने का भरपूर मजा लिया। उसने श्रीकांत से कहा, “एक बार मेरे साथ आओ, रूपेशका के घर में ऐसे कई खिलौने हैं वह खेलने के लिए।” श्रीकांत खिलौना घर जाना चाहते थे। एक दिन वह अक्षय के साथ वहां गया। वहां अपना मोबाइल फोन देते हुए, वह एक पिल्ला और एक बात करने वाला तोता लाया।

एक रविवार, श्रीकांत, अक्षय और अक्षय की बहन रिचा सभी रूपेशका के घर पहुंचे। खिलौने सिर्फ खिलौने हैं हर जगह आप टॉयहाउस में दिखते हैं। तीनों बच्चे चाबी, रिमोट कंट्रोल, ताली बजाते, कूदते, दीवार पर चढ़ते, हवा में उड़ते, सिर हिलाते, आँखें मूँदकर कई खिलौनों को देखकर खुश होते थे।ट्रेन से खेलना, गुड़ियों के साथ खेलना, दूर से गाड़ी चलाना, भालू को नहलाना, पिल्लों को चलाना, रसोई घर के खिलोनो से खाना बनाना। इस प्रकार कई प्रकार से बच्चे स्वयं आनंद लेने लगे।

एक तोता बाहर बैठा सबको लगा यह भी खिलौना है तो ऋचा उसे पकडे ने के लिए दौड़ी जैसे ही उसके पास गयी तोता उड़ गया सब बहोत हसे, अब बचो को भी मजा आ रहा था और रुपेश भाई को भी अकेला महसूस नहीं हो रहा था.

Summary (सारांश)

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